महाकाल का विराट तांडव 🔥
जब ब्रह्मांड अंधकार में डूबा था और दिशाएँ मौन थीं, तब महाकाल का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ। 🌌 जटाओं से बहती गंगा, मस्तक पर अर्धचंद्र और भस्म से आच्छादित तेजस्वी शरीर—यह दृश्य स्वयं समय को भी थर्रा देने वाला था। ⚡
जैसे ही तीसरा नेत्र जागृत हुआ, अग्नि और ऊर्जा की लहरें चारों ओर फैल गईं। 🔱 डमरू की प्रत्येक ध्वनि से सृष्टि की गति बदलने लगी और तांडव के हर चरण से पृथ्वी कांप उठी। पर्वत टूटने लगे, आकाश में बिजली चमकने लगी और ब्रह्मांड में कंपन फैल गया। 🌋
परंतु महाकाल का तांडव केवल विनाश नहीं, सृजन का भी संकेत है। 🔥 जब रौद्र शांत हुआ, तब वही महाकाल करुणामय मुद्रा में आशीर्वाद देते हुए प्रकट हुए। 🙏 उनकी दिव्य शांति ने सिखाया कि हर अंत एक नई शुरुआत है। ✨
महाकाल की भक्ति ही शक्ति है, और उनका तांडव हमें साहस, श्रद्धा और आत्मबल का संदेश देता है। 🕉️ हर हर महादेव! 🚩

