सूरज ढल रहा था 🌅 और सुनहरी रोशनी गाँव की पगडंडी पर बिखरी हुई थी। रंजीत चुपचाप खड़ा दूर आसमान को देख रहा था। हवा हल्के से उसके बालों को छू रही थी, लेकिन उसके दिल में उठ रही यादों को कोई शांत नहीं कर पा रहा था। हर ढलती शाम उसे अनीशा की याद दिलाती थी।
उधर अनीशा खिड़की के पास खड़ी थी 👰✨। लाल चुनरी की हल्की परछाईं उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसकी आँखों में नमी थी, पर चेहरे पर दृढ़ विश्वास। दूरी ने उनके कदम अलग कर दिए थे, लेकिन दिलों की धड़कन अब भी एक ही नाम पुकारती थी।
दो अलग रास्ते, दो अलग दुनिया… फिर भी एक ही कहानी। 🌙
रंजीत को विश्वास था कि किस्मत एक दिन उन्हें फिर आमने-सामने खड़ा करेगी। अनीशा भी जानती थी कि सच्चा प्रेम दूरी से नहीं टूटता, बल्कि और गहरा हो जाता है।
डूबते सूरज और खामोश रातों के बीच उनका प्रेम और मजबूत होता गया ❤️।
क्योंकि कुछ रिश्ते समय से नहीं, विश्वास से जुड़े होते हैं।
