🔱 महाकाल की कृपा से लौटा बिछड़ा प्यार 💞
उज्जैन की पावन गलियों में रणजीत और अनीशा का प्रेम कभी मंदिर की आरती सा उज्ज्वल था। दोनों ने साथ जीवन बिताने का सपना देखा था, पर परिस्थितियों ने ऐसा मोड़ लिया कि रणजीत को शहर छोड़कर जाना पड़ा। अनीशा वहीं रह गई — यादों, अधूरी बातों और इंतज़ार के साथ।
हर सुबह वह महाकालेश्वर मंदिर में दीप जलाकर प्रार्थना करती — “हे महाकाल, यदि हमारा प्रेम सच्चा है तो उसे फिर से मेरे जीवन में लौटा दीजिए।” उसकी आँखों में आँसू थे, पर विश्वास अटूट था। 🔱
समय बीतता गया। सावन आया, मंदिर की घंटियाँ गूँज उठीं, भस्म आरती की दिव्य ज्योति वातावरण में फैल गई। उसी पवित्र क्षण में पीछे से एक परिचित आवाज सुनाई दी — “अनीशा…” 💞
वह रणजीत था। जीवन की ठोकरों ने उसे सिखा दिया था कि सच्चा घर वहीं होता है जहाँ प्रेम और विश्वास हो। अनीशा की आँखों में खुशी के आँसू चमक उठे। महाकाल की कृपा और आरती की पवित्र ध्वनि के बीच दोनों फिर एक हो गए। ✨
उन्हें एहसास हुआ — जब प्रेम सच्चा हो और विश्वास महाकाल पर अडिग, तो बिछड़े रास्ते भी फिर मिल जाते हैं। 🔔💫



