🔱 महाशिवरात्रि की पावन रात
🌙 महाशिवरात्रि की वह शांत और चाँदनी से भरी रात थी। पूरा गाँव गहरी नींद में था, लेकिन आरव के मन में अनेक प्रश्न और बेचैनियाँ जाग रही थीं। जीवन की कठिनाइयों ने उसके हृदय को भारी कर दिया था। वह धीरे-धीरे मंदिर की ओर बढ़ा। ठंडी हवा उसके चेहरे को स्पर्श कर रही थी, जैसे प्रकृति स्वयं उसे सांत्वना दे रही हो।
मंदिर के आँगन में दीपक टिमटिमा रहे थे। 🔥 उसने श्रद्धा से एक दीप जलाया और आँखें बंद कर “ॐ नमः शिवाय” का जप करने लगा। हर मंत्र के साथ उसके भीतर का भय और क्रोध पिघलने लगा। आँसू उसकी आँखों से बहते रहे, पर मन हल्का होता गया। उसे अनुभव हुआ कि सच्चा शिव बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही निवास करते हैं।
धीरे-धीरे भोर की पहली किरण मंदिर के आँगन में उतरी। 🌅 आरव के चेहरे पर एक शांत मुस्कान थी। उसने समझ लिया था कि जब हम अहंकार छोड़कर विश्वास अपनाते हैं, तभी जीवन में सच्ची शांति मिलती है। उस रात उसने अपने भीतर के अंधकार पर विजय पा ली थी। 🔱✨



